केरल हाईकोर्ट ने टोल वसूली चार सप्ताह के लिए कर दी थी बंद
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से पूछा कि अगर केरल के त्रिशूर में 65 किलोमीटर लंवे राजमार्ग को तय करने में 12 घंटे लगते हैं, तो किसी यात्री को 150 रुपए के टोल (शुल्क) का भुगतान करने के लिए क्यों कहा जाए। चीफ जस्टिस वीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और एनवी अंजारिया की बेंच ने यह टिप्पणी एनएचएआई और टोल वसूलने का अधिकार रखने वाली कंपनी गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए की। याचिका में त्रिशूर के पलियेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल संग्रह पर रोक लगाने के केरल हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
सीजेआई ने कहा, अगर किसी व्यक्ति को सड़क एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में 12 घंटे लगते है, तो उसे 150 रुपए क्यों देने चाहिए। जिस सड़क पर एक घंटे का समय लगने की उम्मीद है, उसमें 11 घंटे और लगते है और उन्हें टोल भी देना पड़ता है। सुनवाई के दौरान अदालत को सप्ताहांत में इस मार्ग पर लगभग 12 घंटे तक यातायात जाम रहने की जानकारी दी गई। हाईकोर्ट ने छह अगस्त को राष्ट्रीय राजमार्ग 544 के एडापल्ली – मन्नुथी खंड की खराव स्थिति और निर्माण कार्यों के कारण उत्पन्न गंभीर यातायात जाम के आधार पर टोल निलंवन का आदेश दिया था ।
यह भी पढ़ें : वो रेलवे स्टेशन स्टेशन जो सिर्फ एक स्कूली लड़की के लिए सालों तक चलता रहा
एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और टोल वसूल करने का अधिकार रखने वाली कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलें सुनने के वाद अदालत ने कहा कि हम हर पहलू पर विचार करेंगे, आदेश सुरक्षित रखेंगे। जस्टिस चंद्रन ने कहा, जिस दुर्घटना के कारण यह सड़क अवरुद्ध हुई, वह महज दैवीय कृत्य नहीं था, जैसा कि मेहता ने तर्क दिया, वल्कि एक ट्रक के गड्ढे में गिर जाने के कारण हुई थी।
मेहता ने कहा, जहां अंडरपास का निर्माण कार्य चल रहा था, वहां एनएचएआई ने सर्विस रोड उपलब्ध कराई थी, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मानसून की वारिश ने निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी है। उन्होंने एक उदाहरण भी दिया जिसमें टोल को निलंवित करने के बजाय आनुपातिक रूप से कम करने का सुझाव दिया गया था। वहीं गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा, उसने 60 किलोमीटर का क्षेत्र अपने नियंत्रण में रखा है और उसने सर्विस रोड की रुकावटों के लिए पीएसजी इंजीनियरिंग सहित तीसरे पक्ष के ठेकेदारों को दोषी ठहराया।
दीवान ने हाईकोर्ट के फैसले को वेहद अनुचित बताते हुए कहा कि जब मैं दूसरों को सौपे गए काम के लिए जिम्मेदार नहीं हूं, तो मेरी आय का स्रोत नहीं रोका जा सकता। मुझे सिर्फ 10 दिनों में ही 5-6 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। अदालत ने कहा, टोल वसूली का अधिकार रखने वाली कंपनी को हाई कोर्ट ने एनएचएआई के खिलाफ नुकसान का दावा करने की अनुमति दे दी है।
यह भी पढ़ें : चुनाव आयोग की राहुल गांधी को दो टूक : सात दिन में हलफनामा दें या देश से माफी मांगें
